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पà¥à¤²à¥‚रिसी का इलाज और बचाव
पà¥à¤²à¥‚रिसी से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ दरà¥à¤¦ और सूजन का इलाज आमतौर पर नॉनसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤‡à¤¡à¤² à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डà¥à¤°à¤—à¥à¤¸ (à¤à¤¨à¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¡à¥€) से किया जाता है, जैसे कि इबà¥à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¨ (à¤à¤¡à¤µà¤¿à¤², मोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ आईबी, अनà¥à¤¯)। कà¤à¥€-कà¤à¥€, डॉकà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ दवा à¤à¥€ लिख सकते हैं।
आप यह नहीं जान सकते हैं कि चोट या बीमारी से पà¥à¤²à¥‚रिसी होगा या नहीं, लेकिन आप धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ न करके पà¥à¤²à¥‚रिसी के जोखिम को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही नियमित चेकअप कराकर और ऑटोइमà¥à¤¯à¥‚न या फेफड़ों के रोगों का उचित उपचार, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ को रोकने के लिठहाथ धोने जैसे हाइजीन के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना मददगार साबित हो सकता है।
पà¥à¤²à¥‚रिसी का उपचार (Treatment of pleurisy) :-
पà¥à¤²à¥‚रिसी (Pleurisy) का उपचार करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° उसके कारणों का पता लगाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कारण जानने के बाद ही सही तरीके से उपचार किया जा सकता हैः
यदि पà¥à¤²à¥‚रिसी का कारण बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हैं तो इसे à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ देकर ठीक किया जाता है।
यदि फंगस की वजह से पà¥à¤²à¥‚रिसी हà¥à¤† है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको à¤à¤‚टीफंगल दवा देगा।
यदि पà¥à¤²à¥‚रिसी वायरस के कारण हà¥à¤† है तो कà¥à¤› दिनों या हफà¥à¤¤à¥‡ में आप अपने आप ठीक हो जाते हैं।
पà¥à¤²à¥‚रिसी से पीड़ित कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤²à¥‚रा की दोनों लेयर के बीच बहà¥à¤¤ अधिक तरला पदारà¥à¤¥ जमा हो जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° थोड़ा सा तरल निकालता है। वह पà¥à¤²à¥‚रा के बीच की थोड़ी सी जगह में सà¥à¤ˆ डालकर à¤à¤¸à¤¾ करता है।
दरà¥à¤¦ कम करने के लिठपेनकिलर और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ दवाओं का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
यदि खांसी बहà¥à¤¤ अधिक आ रही है जिससे दरà¥à¤¦ बढ़ता है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° खांसी कम करने की दवा देता है।
जिस तरफ दरà¥à¤¦ हो रहा है उसी साइड सोने पर आपको दरà¥à¤¦ से थोड़ी राहत मिलेगी। जैसे ही दरà¥à¤¦ कम हो जाठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और गहरी सांस लें।
याद रखें इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤®à¥‹à¤•िंग बिलà¥à¤•à¥à¤² न करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे फेफड़ों में इरिटेशन हो सकती है।
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